P-ISSN: 2789-1607, E-ISSN: 2789-1615
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International Journal of Literacy and Education

2023, Vol. 3, Issue 1, Part A

माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर प्रभाव


Author(s): डाॅ. सुरेन्द्र सिंह सिनसिनवार, प्रतिभा वर्मा

Abstract: शिक्षा किसी प्रान्त, राष्ट्र या समाज के सुनहरे भविष्य, वर्तमान की हकीकत तथा अतीत के अनुभवों पर आधारित होता है। जिसप्रकार स्वस्थ शरीर के निर्माण में शुद्ध रक्त का संचार करने वाली धमनियों का स्थान है उसीप्रकार जीवन के सर्वांगीण विकास में शिक्षा का अपरिहार्य स्थान होता है। शिक्षा मानव जीवन के लिए विकास की प्रक्रिया है। शिक्षा मानव की उन्नति, आधुनिकीकरण और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति की एक कुंजी है। शिक्षा की तड़प आंतरिक प्रेरणा और मानव संसाधन विकास में सहायक है। इसप्रकार शिक्षा मानव जाति के ज्ञान संवर्धन के लिए एवं गर्व के साथ जीवित रहने के लिए एक सतत् प्रक्रिया है। शिक्षा एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है जो व्यक्ति को बदलते सामाजिक परिवेश में ढालकर उसके व्यक्तित्व में निखार लाती है। सर्वशक्तिमान ईश्वर ब्रह्माण्ड का सृष्टा है। वह परम आत्मा है और उसमें सूक्ष्म सृजनात्मक योग्यताएँ विद्यमान हैं। उसने हम सब को तथा प्रकृति की सभी वस्तुओं को बनाया है। हम सब उसी की सृष्टि हैं। भारतीय दर्शन के अनुसार हम उस परमात्मा के अंश हैं, इसलिए हममें सृजनात्मक योग्यताएँ भी विद्यमान हैं।हम में से कई व्यक्तियों में उच्च स्तरीय सृजनात्मक प्रतिभाएँ होती हैं और यही व्यक्ति कला, साहित्य, विज्ञान, व्यापार, शिक्षण आदि विभिन्न मानवीय क्षेत्रों में संसार का नेतृत्व करते हैं। पहले सामान्य लोगों का यह विश्वास था कि उपलब्धि के लिए केवल बुद्धि जिम्मेदार है। किन्तु इस क्षेत्र में हुए अनुसन्धान इस तरफ संकेत करते हैं कि बुद्धि का योगदान 50 प्रतिशत से भी कम है। इसका मतलब है कि 50 प्रतिशत से भी अधिक बुद्धि के अलावा अन्य कारकों का भी योगदान है। इन कारकों में गैर बौद्धिक(non-intellectual) बुद्धि, सामाजिक बुद्धि, सांवेगिक बुद्धि, आध्यात्मिक बुद्धि भावनात्मक बुद्धि के अलावा विभिन्न प्रकार के शारीरिक एवं समाज मनोवैज्ञानिक कारकों तथा सृजनात्मकता का नाम आता है जो शैक्षिक उपलब्धि को प्रभावित करती हैं। विद्यार्थियों में सृजनात्मकता का गुण रहता है तथा इनका उच्च व निम्न स्तर उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर पर्याप्त प्रभाव डालती है। प्रस्तुत शोध माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए किया जाएगा। शोध की परिकल्पना है कि माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर कोई सार्थक प्रभाव नहीं पड़ता। प्रस्तुत शोध में शोधकत्र्री द्वारा माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता के अध्ययन हेतु सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया। शोध हेतु न्यादर्श के रूप में माध्यमिक स्तर के 200 विद्यार्थियों (100 छात्र एवं 100 छात्राएँ) को लिया गया है। प्रस्तुत शोध भरतपुर शहर के माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों तक ही सीमित है। छात्रों के सृजनात्मकता के आँकड़ों के संग्रहण हेतु बाकर मेंहदी द्वारा निर्मित “सर्जनात्मक चिन्तन का शाब्दिक परीक्षण’’ का प्रयोग किया गया है तथा शैक्षिक उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों के गत वर्ष के प्राप्तांकों का प्रतिशत को लिया गया है। साँख्यिकीय विधियों के रूप में मध्यमान, मानक विचलन तथा टी-परीक्षण का प्रयोग किया गया है। सृजनात्मकता प्रमापनी पर प्रदत्तों के विश्लेषण के उपरान्त निष्कर्ष रूप में पाया कि माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर कोई सार्थक प्रभाव नहीं पड़ता। शोध से प्राप्त निष्कर्ष विद्यार्थियों के लिए, पालकों के लिए, शिक्षकों, शिक्षा नीति निर्धारकों, प्रबंधकों तथा भावी शोधकर्ताओं आदि के लिए उपयोगी साबित होंगे।

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How to cite this article:
डाॅ. सुरेन्द्र सिंह सिनसिनवार, प्रतिभा वर्मा. माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर प्रभाव. Int J Literacy Educ 2023;3(1):31-34.
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